डलहौजी का पंचपुला और दैनकुंड पीक: 360 डिग्री हिमालयन व्यू देखने का अनोखा अनुभव
हवाओं के संगीत के लिए विख्यात दैनकुंड चोटी से पीर पंजाल और धौलाधार का दृश्य बेहद मनोहारी दिखता है।
हवाओं के संगीत के लिए विख्यात दैनकुंड चोटी से पीर पंजाल और धौलाधार का दृश्य बेहद मनोहारी दिखता है।
बिलासपुर के भंडारी राम ने बर्मा फ्रंट पर असाधारण वीरता दिखाकर ब्रिटिश साम्राज्य का सर्वोच्च सैन्य सम्मान प्राप्त किया था।
पहाड़ी लोकधुनों को शास्त्रीय बंदिशों में ढालकर राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाले अद्वितीय संगीत मनीषी।
लोहे की सांकलों से शरीर पर प्रहार करने के बाद भी नहीं होता कोई घाव, विज्ञान के लिए आज भी अबूझ पहेली।
1947 में जब पाकिस्तानी कबाइलियों ने हमला किया, तब मेजर सोमनाथ शर्मा ने आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक मोर्चे पर डटे रहने का संदेश दिया था।
व्यास नदी के तट पर स्थित बाबा भूतनाथ का स्वयंभू शिवलिंग और चांदी की पालकी में विराजित माधोराय जी।