1947 में जब पाकिस्तानी कबाइलियों ने हमला किया, तब मेजर सोमनाथ शर्मा ने आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक मोर्चे पर डटे रहने का संदेश दिया था।
कांगड़ा: 4 कुमाऊं रेजिमेंट के जांबाज मेजर सोमनाथ शर्मा का अदम्य बलिदान भारतीय सेना के स्वर्णिम इतिहास का गौरव स्तंभ है।