पारंपरिक पहाड़ी वाद्य यंत्र: करनाल, रणसिंगा, ढोल-दमामा और शहनाई की गूंज से जीवंत होती है देव संस्कृति
तांबे और पीतल से बने प्राचीन वाद्य यंत्रों की ध्वनि मीलों दूर तक पहाड़ों में गुंजायमान होती है।
तांबे और पीतल से बने प्राचीन वाद्य यंत्रों की ध्वनि मीलों दूर तक पहाड़ों में गुंजायमान होती है।
प्राकृतिक खनिजों और वनस्पतियों के रंगों से बारीक गिलहरी के बालों के ब्रश से बनाई जाती है यह विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग।
हवाओं के संगीत के लिए विख्यात दैनकुंड चोटी से पीर पंजाल और धौलाधार का दृश्य बेहद मनोहारी दिखता है।
बसपा नदी के किनारे बसे छितकुल में लकड़ी के बने घर और सेब के बगीचे किसी पोस्टकार्ड जैसी सुंदरता पेश करते हैं।
पॉपलर के पेड़ों की कतारें और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच गिरता दूधिया झरना मन मोह लेता है।