चंबा का सूही माता मेला: रानी सुनयना के बलिदान की याद में केवल महिलाओं और बच्चों का अनूठा उत्सव
नगर में पानी लाने के लिए हंसते-हंसते प्राण न्योछावर करने वाली रानी की स्मृति में गाए जाते हैं सुकरात गीत।
नगर में पानी लाने के लिए हंसते-हंसते प्राण न्योछावर करने वाली रानी की स्मृति में गाए जाते हैं सुकरात गीत।
गुर के माध्यम से होने वाली देववाणी पर अटूट विश्वास, विवादों का निपटारा अदालत के बजाय देव दरबार में।
धर्मशाला के खनियारा में जन्मे इस देशभक्त संगीतकार ने अपनी धुनों से करोड़ों भारतवासियों के दिलों में क्रांति की ज्वाला जलाई।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर सिरमौर के किसानों ने समानांतर सरकार बनाकर अंग्रेजों को चुनौती दी थी।
सड़क, स्कूल, अस्पताल और जलविद्युत परियोजनाओं के जाल से दुर्गम पहाड़ियों को मुख्यधारा से जोड़ने वाले लोकप्रिय जननायक।
पब्बर नदी के तट पर स्थित इस सिद्ध पीठ में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय बिताया था।